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kismat ke bharoshe

किश्मत के भरोषे  एक दिन की बात है जब एक  राम नाम का व्यक्ति ने अपनी जिन्दगी के समय को सिर्फ भगवान् के जप तप में ही गवाते गवाते जिन्दगी की अंतिम सास लेने की अवस्था पर पहुच गया /उस समय उसे याद आया की मैंने अपनी जिन्दगी के  सम्पूर्ण समय को भगवान् के जप तप करने में ही गवा दिया ,मैंने कर्म पर ध्यान ही नहीं दिया जिसके कारण से आज मेरा जीवन सिर्फ अँधेरे का गुलाम है /मैंने अपनी जीवन को सिर्फ किस्मत के सहारे छोड़ दिया ,जिसका परिणाम भोग रहा हु  ,मैंने जीवन  में कुछ भी काम नहीं किया क्योकि मैंने अपने जिन्दगी को किस्मत के भरोसे ही छोड़ दिया और भगवान् नाम की ही माला  जपता रहा /               आज मेरा जीवन का अंतिम  समय आ गया, तब मुझे जिन्दगी के सत्य का ज्ञान हुआ है ,लेकिन मैंने जिन्दगी के सम्पूर्ण समय को ब्यर्थ ही गवा दिया जिसके कारण  से  अब कुछ नहीं कर पा रहा हु क्योकि जिन्दगी का अंतिम पल आ गया है / इस अंतिम पल में आप लोगो को एक सन्देश देना चाहता हूँ -आप लोग कभी भी जिन्दगी को किस्मत के सहारे मत छो...